संयुक्त खाताधारकों के अधिकार एवं जिम्मेदारियाँ
1. दो या उससे अधिक व्यक्तियों के नाम में खोला गया खाता संयुक्त खाता कहलाता है।
2. खाता खोलने के फार्म में सभी संयुक्त खाताधारकों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
3. संयुक्त खाते भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 45 के तहत शासित है।
4. इसके विपरीत अनुदेश न होने पर, संयुक्त खाते में परिचालन सभी संयुक्त खाताधारकों द्वारा प्राधिकृत होना चाहिए।
5. इस व्यावहारिक समस्या का सामना करने के लिए बचत बैंक तथा चालू खाते के मामले में खाते के परिचालन संबंधी विशिष्ट अनुदेश जिसे परिचालन अधिदेश भी कहा जाता है, खाता खोलने के फार्म में
"खाते का परिचालनकर्ता" कॉलम में दिया जा सकता है । इसी तरह बचत बैंक, चालू तथा मीयादी जमा खाते के लिए चुकौती शर्त "को शेष की चुकौती" कॉलम में दी जा सकती है ।
6. खाते में परिचालन तथा खाता बंद करते समय / मीयादी जमा के मामले में जमा की परिपक्वता के समय चुकौती अनिवार्यतः खाता खोलते समय दिए गए अधिदेश के अनुसार ही हो ।
7. यदि आहरित चेक में संयुक्त खाताधारकों में से एक के द्वारा परिवर्तन किया जाता है, तो परिवर्तन की पुष्टि उसी हस्ताक्षरकर्ता द्वारा की जाए , दूसरों से नहीं ।
8. संयुक्त खाते को खोलने तथा परिचालित करने का प्राधिकार संयुक्त खाताधरक/कों को उधार लेने, अति आहरण या विनिमय बिलों को भुनाने का अधिकार नहीं देता, जिसके लिए क्रमश : संयुक्त खाताधारकों
तथा बैंक के बीच विशेष करार होना चाहिए ।
9. किसी एक संयुक्त खाताधारक द्वारा बैंक को अधिसूचित कोई भी विवाद के मामले में,अधिदेश स्वतः निरस्त हो जाएगा तथा ऐसे मामले में जब तक सभी संयुक्त खाताधारकों द्वारा विधिवत् हस्ताक्षरित नया अधिदेश
प्रस्तुत नहीं किया जाता तब तक सभी के द्वारा संयुक्त रूप से खाता परिचालित किया जाना है ।
10. कोई भी संयुक्त खाता धारक परिचालन की विधि का लिहाज किए बिना अधिदेश निरस्त कर सकता है । प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता / अधिदेश धारक द्वारा आहरित चैक दूसरे खाताधारक द्वारा प्रति अधिदेशित किया
जा सकता है, जो खाता परिचालित करने के लिए प्राधिकृत है या नहीं है । ऐसे चेक का भुगतान सभी संयुक्त खाताधारकों की सहमति से ही किया जा सकता है ।
11. एक / एक से अधिक खाताधारकों के पक्ष में / को देय चेक तथा अन्य परक्राम्य लिखत संयुक्त खाते में जमा किया जा सकता है बशर्ते ऐसे चेक तथा अन्य परक्राम्य लिखत उक्त चेक / लिखत के आदाता /ओं
के हस्ताक्षर / सहमति से जमा किया जाता है । फिर भी , संयुक्त रूप से खाताधारकों को देय चेक / परक्राम्य लिखत धारक / कों के व्यक्तिगत खाते में जमा नहीं किया जा सकता है ।
12.संयुक्त खाताधारक प्रचलित दिशानिदेशों के अनुसार नामांकन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं । संप्रति, खाताधारक एक व्यक्ति को नामिती के रूप में नामित कर सकते हैं । यदि जमा खाते के लिए नामांकन नहीं
किया गया हो तो किसी भी संयुक्त खाताधारक, की मृत्यु पर उत्तरजीवी खाताधारक नया नामांकन कर सकते हैं। संयुक्त खाते के मामले में नामिती का अधिकार सभी खाताधारकों की मृत्यु पर ही उत्पन्न होता है ।
13. किसी भी खाता धारक की मृत्यु, दिवालियापन या मानसिक अस्वस्थता की सूचना की प्राप्ति पर, खाते में परिचालन रोक दिया जाएगा ।
14. किसी खाताधारक की मृत्यु पर तथा नामांकन या चुकौती शर्त के न होने पर, संयुक्त खाते की शेष राशि मृत खाताधारक के विधिक उत्तरधिकार सहित उत्तरजीवी खाता धारकों को अदा की जाएगी ।