परियोजना वित्त

परियोजना वित्त

अधिक धन के विनियोजन और ऋण की लंबी अवधि जिनका बैंक की आस्ति-देयता प्रबंधन प्रणाली पर पड़नेवाले प्रतिकूल प्रभाव और तरलता पर पड़नेवाले प्रभाव के मद्देनज़र परियोजना के लिए वित्त के प्रस्तावों पर बैंक द्वारा चयनात्मक आधार पर विचार किया जाता है.  आमतौर पर ऐसी परियोजनाओं को सावधि ऋण प्रदाता वित्तीय संस्थाओं और अन्य सार्वजनिक / निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ कंसोर्टीयम (consortium) व्यवस्था के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है.

परियोजना का कंसोर्टीयम के अग्रणी बैंक द्वारा मूल्यांकन किया जाता है और अन्य सभी बैंकों द्वारा अग्रणी बैंक द्वारा किए गए मूल्यांकन को स्वीकार किया जाता है.  यदि आवश्यक हो तो मूल्यांकन के लिए, वित्तीय संस्थाओं / वाणिज्यिक बैंकों के इस क्षेत्र के / परियोजना मूल्यांकन समूहों के पेशेवरों की सहायता प्राप्त की जाती है.

परियोजना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने से पहले, परियोजना के प्रारम्भ के समय प्रचलित समग्र आर्थिक स्थिति और साथ ही परियोजना के सामान्य जीवन-काल के दौरान संभवतः प्रचलित रहनेवाली परिस्थिति के परिदृश्य में परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता और वित्तीय लाभप्रदता का आकलन किया जाना चाहिए.  परियोजना महत्वपूर्ण मापदण्डों में बदलाव के उचित स्तर को झेलने में सक्षम होनी चाहिए जिसे नकदी प्रवाह के संवेदनशीलता विश्लेषण द्वारा स्थापित किया जाना चाहिए.

परियोजना के वित्तीयन के स्रोत साथ ही आकस्मिक व्यय जैसे कि लागत/समय में होनेवाली बढ़ोत्तरी के लिए प्रावधान किए जाने चाहिए.  सीमाओं की मंजूरी/संवितरण के पहले परियोजना के लिए प्रमोटरों के अलावा अन्य सभी स्रोतों से निधि को पूर्ण रूप से प्राप्त किया जाना चाहिए.

जहाँ कहीं परियोजना असामान्य रूप से लंबी अवधि की हो, जैसे कि बुनियादी ढांचे का विकास, एजेंसियों जैसे कि वित्तीय संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है और बैंक की निधियों, जिन्हें मुख्य रूप से अल्पावधि ऋण संस्थाओं, टेक-आउट वित्तीयन, प्रतिभूतिकरण, अंतर-बैंक प्रतिभागी प्रमाण-पत्र आदि से प्राप्त किया जाता है, की अवरुद्धता कम की जाती है.

परियोजना वित्त के तहत संवितरण, केवल समय समय पर प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार और कंसोर्टीयम द्वारा निर्धारितानुसार मंजूरी की शर्तों, कंसोर्टीयम द्वारा पहले से संवितरित निधियों का सहीं उपयोग सुनिश्चित करने, परियोजना के कार्यान्वयन के प्रत्येक चरण में आवश्यक मार्जिन की पूर्ति और सलाहकारों / विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणीकरण के बाद ही किया जाएगा.

इस तरह की ऋण सुविधाओं पर ब्याज दर उधारकर्ता के वर्गीकरण और समय समय पर बैंक की ब्याज दर नीति के आधार पर निर्धारित की जाएगी.

परियोजना की प्रकृति, ऋण की मात्रा और अवधि, निवेश पर प्रत्याशित प्रतिलाभ और जोखिम धारणा के आधार पर जैसा आवश्यक होगा, ऋण सुविधाओं को मूर्त आस्तियों और संपार्श्विकों से प्रतिभूत किया जाएगा.

उपरोक्त के अलावा, समय समय पर लागू बैंक के सामान्य उधार मानदंड और नीतिगत दिशानिर्देश भी परियोजना वित्त मामलों के लिए समान रूप से लागू होंगे.

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